नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ ने कई महत्वपूर्ण सड़क और पुल संपर्कों को तोड़ दिया है। आपदा प्रभावित और अलग-थलग पड़े समुदायों को फिर से जोड़ने के लिए नेपाल भारत और चीन से अस्थायी पुलों की मांग कर रहा है। दोनों देशों ने इस मांग पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, सोमवार तक इस आपदा में मरने वालों की संख्या 1,357 थी, जबकि 4,994 लोग लापता थे। अब तक 13,583 लोगों को बचाया जा चुका है।
बाढ़ से सड़क और पुलों को भारी नुकसान
नेपाल-तिब्बत बॉर्डर के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने (एवलांच) से आई बाढ़ ने भोटेकोशी नदी के बहाव को बहुत तेज कर दिया। इसके बाद उत्तरी और मध्य नेपाल में घरों, गाड़ियों, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचा। पनबिजली प्रोजेक्ट्स भी प्रभावित हुए।
बाढ़ ने रसुवा और चितवन के बीच गाड़ियों के चलने लायक 41 पुलों को नष्ट कर दिया। चार अन्य पुल आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए। इस कॉरिडोर पर मौजूद 63 पुलों में से केवल 18 सुरक्षित बचे हैं।
रसुवा में भी आपदा के कारण नुवाकोट के साथ सड़क संपर्क कट गया। फुरके खोला पर बना कंक्रीट का पुल नष्ट होने से धाडिंग जिले के मुख्यालय धाडिंगबेसी और पृथ्वी राजमार्ग के बीच सीधा संपर्क टूट गया।
भारत और चीन से अस्थायी पुलों की मांग
नेपाल ने सड़क संपर्क बहाल करने के लिए भारत और चीन, दोनों से अस्थायी पुलों की मांग की है। चीन ने मुस्तांग में कोराला बॉर्डर क्रॉसिंग के लिए 100-मीटर के दो बेली पुल पहले ही भेज दिए हैं। यह जानकारी मंगलवार की द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट में दी गई है।
भारत ने भी बेली पुलों की आपूर्ति करने की पेशकश की है।
रिपोर्ट के अनुसार, सड़क विभाग ने बाढ़ में बही सड़कों के हिस्सों को साफ कर उन्हें फिर से खोलने का काम शुरू कर दिया है, ताकि अस्थायी पुल लगाए जा सकें।
बेली पुलों को साइट तक पहुंचाना बड़ी चुनौती
द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट में सड़क विभाग के उप महानिदेशक और प्रवक्ता शुभराज न्यूपाने के हवाले से बताया गया है कि विभाग अस्थायी पुल लगाने की दिशा में काम कर रहा है। नेपाली सेना अलग से नुवाकोट के देवीघाट में एक एक्रो (Acrow) पुल लगा रही है।
भौतिक बुनियादी ढांचा और परिवहन मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुशील बाबू ढकाल ने बताया कि सड़क विभाग के पास 11 बेली पुल हैं, जिनमें से हर 48 मीटर तक लंबा है। हालांकि, क्षतिग्रस्त स्थानों तक इन्हें पहुंचाना बड़ी चुनौती है, क्योंकि कई जगहों तक जाने वाली सड़कें ही बाढ़ में बह गई हैं।
ढकाल ने कहा, “जहां बेली पुल उपलब्ध भी हैं, वहां उन्हें साइटों तक ले जाने के लिए कोई सड़क नहीं है। बाढ़ से क्षतिग्रस्त रास्तों को फिर से खोलने का काम चल रहा है।”
सड़क-पुलों के पुनर्निर्माण पर कितना खर्च आएगा?
रिपोर्ट के मुताबिक, सड़क विभाग ने सड़कों और पुलों को हुए नुकसान का अनुमान एनपीआर 30 अरब लगाया है। इनके पुनर्निर्माण में लगभग एनपीआर 50 अरब खर्च आने की उम्मीद है।
इस भारी नुकसान के बीच सड़क और पुल संपर्क बहाल करना बचाव और राहत कार्यों के लिए भी चुनौती बना हुआ है।
सिर्फ 98 शवों की पहचान हो सकी
बाढ़ के पानी से बरामद शवों की पहचान करने में भी अधिकारी संघर्ष कर रहे हैं। एनडीआरआरएमए के अनुसार, सोमवार तक सिर्फ 98 शवों की पहचान हो पाई थी और उन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया था।