Delhi Building Collapse : सत्य निकेतन हादसे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 10 सितंबर को होगी अहम सुनवाई

Delhi Building Collapse : सत्य निकेतन हादसे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 10 सितंबर को होगी अहम सुनवाई

दिल्ली के सत्य निकेतन में बहुमंजिला इमारत ढहने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। एमिकस क्यूरी अजित सिन्हा ने अदालत में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर हादसे की जानकारी दी है। रिपोर्ट में दिल्ली के सभी PG हॉस्टलों, निजी हॉस्टलों और छात्रों के रहने वाली जगहों की सुरक्षा जांच और ऑडिट-निरीक्षण कराने की सिफारिश की गई है। इस रिपोर्ट पर गुरुवार 10 सितंबर को सुनवाई होगी।

सत्य निकेतन में इससे पहले अप्रैल 2022 में भी बिल्डिंग गिरने की घटना हुई थी, जिसमें 2 लोगों की मौत और 4 लोग घायल हुए थे। अब 6 सितंबर को दोबारा बहुमंजिला इमारत गिरने की घटना के बाद इमारतों की सुरक्षा और नियमित जांच को लेकर सवाल उठे हैं।

6 सितंबर को कैसे हुआ हादसा?

एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट के मुताबिक, 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे सत्य निकेतन के P-14 में बहुमंजिला इमारत ढह गई। करीब 55 वर्ग गज क्षेत्र में बनी इस इमारत में बेसमेंट के अलावा चार मंजिलें थीं। इसे छात्रों के लिए ‘Hostel Daze’ नाम से बॉयज PG के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था।

हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत और कम से कम 12 लोगों के बचाए जाने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। हादसे की सटीक वजह की जांच जारी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बेसमेंट में निर्माण संबंधी काम चल रहा था और हादसे से ठीक पहले वहां पानी भरने की भी सूचना थी।

दिल्ली पुलिस ने साउथ कैंपस थाने में मालिक और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 105, 290 और 125 के तहत FIR दर्ज की है। रिपोर्ट के मुताबिक, संपत्ति के मालिक हरि ओम बंसल को 7 सितंबर को राजस्थान में गिरफ्तार किया गया।

MCD के पांच अधिकारी निलंबित

हादसे के बाद MCD ने साउथ जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित किया है। इनमें डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (बिल्डिंग) ललित कुमार गोयल, असिस्टेंट इंजीनियर सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक सत्य निकेतन से सटी एक अन्य इमारत P-213 को भी खतरनाक पाया गया है। MCD ने उसके ध्वस्तीकरण के निर्देश दिए हैं।

PG हॉस्टलों की किन चीजों की जांच की सिफारिश?

रिपोर्ट में दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास चल रहे सभी PG और निजी हॉस्टलों का समयबद्ध सुरक्षा ऑडिट और निरीक्षण कराने की जरूरत बताई गई है।

जांच में स्वीकृत बिल्डिंग प्लान और वास्तविक निर्माण, मंजिलों की संख्या, बेसमेंट में किए गए बदलाव, भूमि उपयोग, स्ट्रक्चरल सेफ्टी, फायर सेफ्टी और आपातकालीन प्रवेश-निकास जैसे मानकों को शामिल करने की सिफारिश की गई है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने MCD को भी दिए निर्देश

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर 7 सितंबर को सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने MCD को दिल्ली में उसके अधिकार क्षेत्र के सभी PG हॉस्टलों का एक सप्ताह के भीतर निरीक्षण कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

रिपोर्ट में यह बताना होगा कि PG हॉस्टल वाली इमारतें जरूरी अनुमति के तहत बनी हैं या नहीं और कहीं बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन तो नहीं हुआ।

हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया कहा कि ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी केवल PG मालिक की नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन और MCD की भी जिम्मेदारी बनती है। कोर्ट ने यह भी जांचने को कहा है कि ढही इमारतें वैध अनुमति के तहत बनी थीं या नहीं।

अगर निर्माण बिना अनुमति या बिल्डिंग बायलॉज के खिलाफ पाया जाता है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानकारी देने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को होगी।