यूपी में मतदाता सूची के नाम पर संजय सिंह और CEO कार्यालय आमने-सामने, पोस्ट पर छिड़ी बहस

यूपी में मतदाता सूची के नाम पर संजय सिंह और CEO कार्यालय आमने-सामने, पोस्ट पर छिड़ी बहस
हाइलाइट्स
• मतदाता सूची के नाम पर संजय सिंह और CEO कार्यालय आमने-सामने
• सुप्रिया श्रीनेत ने CEO कार्यालय की पोस्ट पर उठाए सवाल
• आयोग ने अधिकारियों को संयत भाषा और तथ्यों तक सीमित रहने के निर्देश दिए

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में दर्ज एक नाम को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद सामने आया है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने ‘राम ने यादव को मारा’ नाम पर सवाल उठाया, तो मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने एक्स पर जवाब दिया। इस जवाब में कार्यालय ने हालिया विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में ‘राम ने शर्मा को मारा’ नाम का भी उल्लेख किया।

मामले ने तब और तूल पकड़ा, जब कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने CEO कार्यालय की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। इसके बाद कार्यालय ने स्पष्ट किया कि भारत निर्वाचन आयोग ने संयत भाषा में और बिना अनावश्यक टिप्पणी के केवल तथ्यों तक अपनी बात सीमित रखने के निर्देश दिए हैं।

संजय सिंह ने पूछा- राम ने यादव को ही क्यों मारा?

आप सांसद संजय सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संबोधित करते हुए एक्स पर सवाल उठाया था कि मतदाता सूची में ‘राम ने यादव को मारा’ नाम ही क्यों आया। उन्होंने पूछा कि राम ने सिंह, पाठक, अस्थाना, शर्मा, राय या बिष्ट को क्यों नहीं मारा?

इस सवाल के जवाब में CEO कार्यालय ने एक्स पर कहा कि हालिया विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में ‘राम ने शर्मा को मारा’ नाम भी दर्ज है। कार्यालय ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि कंप्यूटर या सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं है।

पोस्ट में कार्यालय ने टिप्पणी की कि भगवान का शुक्र है कि राम ने किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा, वरना जातिवादी होने के साथ सांप्रदायिक होने का आरोप भी लगता।

सुप्रिया श्रीनेत ने CEO कार्यालय की पोस्ट पर उठाए सवाल

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने CEO कार्यालय के एक्स अकाउंट की पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए पूछा कि इस हैंडल को कौन चला रहा है। उन्होंने निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता पर भी टिप्पणी की।

सुप्रिया श्रीनेत ने लिखा कि आयोग की खास विश्वसनीयता पहले ही नहीं बची है और जो थोड़ा-बहुत भ्रम बाकी है, उसे यह हैंडल अकेले दूर कर रहा है।

आयोग ने अनावश्यक टिप्पणी से बचने के दिए निर्देश

सुप्रिया श्रीनेत की प्रतिक्रिया के बाद CEO कार्यालय ने एक्स पर बताया कि भारत निर्वाचन आयोग की ओर से प्रत्येक मामले में संयत भाषा का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं।

कार्यालय के मुताबिक, अधिकारियों को अपनी बात केवल तथ्यों तक सीमित रखने और अनावश्यक टिप्पणी से बचने के लिए कहा गया है। इस तरह मतदाता सूची में दर्ज नाम को लेकर शुरू हुई सोशल मीडिया बहस में संजय सिंह, CEO कार्यालय और सुप्रिया श्रीनेत की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।