यूपी कैबिनेट के 22 प्रस्ताव मंजूर, गाय पर ₹50 हजार अनुदान और 48 हजार कर्मचारियों को कैशलेस इलाज

यूपी कैबिनेट के 22 प्रस्ताव मंजूर, गाय पर ₹50 हजार अनुदान और 48 हजार कर्मचारियों को कैशलेस इलाज
हाइलाइट्स
• यूपी कैबिनेट में 22 प्रस्तावों को मंजूरी
• एक गाय पर 50 हजार रुपये के अनुदान का प्रावधान
• 48,062 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को मिलेगा कैशलेस इलाज

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में पशुपालन को बढ़ावा देने, कंपनियों के मर्जर और डी-मर्जर से जुड़े स्टांप ड्यूटी नियमों, जल परिवहन को व्यवस्थित बनाने और शिक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों को चिकित्सा सुविधा देने जैसे मुद्दों पर फैसले लिए गए। इनमें एक गाय पर 50 हजार रुपये का अनुदान और 48,062 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने का प्रस्ताव भी शामिल है।

पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए एक गाय पर 50 हजार रुपये का अनुदान

कैबिनेट बैठक में पशुधन क्षेत्र को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया गया। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश दूध उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है। अंडा, ऊन और मत्स्य पालन के क्षेत्र में भी प्रदेश की स्थिति मजबूत है। हालांकि, इन क्षेत्रों में मूल्य संवर्धन, डिजिटल प्रबंधन और संगठित बाजार व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत बताई गई।

सरकार पशुपालन को किसानों की आमदनी बढ़ाने का प्रमुख माध्यम बनाना चाहती है। इसी उद्देश्य से स्टेट लैब स्टार्ट मिशन के गठन का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत रोजगार के अवसर पैदा करने, उद्यमिता को बढ़ावा देने, पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने और पशु उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाएगा।

योजना में उन्नत नस्ल के पशुओं को प्रोत्साहित करने और गायों की नस्ल सुधारने का प्रावधान भी है। दूध उत्पादन बढ़ाकर प्रति गाय प्रतिदिन 10 लीटर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा मुर्गी और बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए भी सहायता देने की बात कही गई है।

पशु बीमा की लागत का 85 फीसदी हिस्सा सरकार देगी

प्रस्ताव के अनुसार, पशुओं के बीमा की कुल लागत का 85 फीसदी हिस्सा सरकार और 15 फीसदी हिस्सा किसान वहन करेंगे। योजना में एक गाय पर 50 हजार रुपये का अनुदान देने का प्रावधान बताया गया है।

सरकार का लक्ष्य आधुनिक तकनीक, बेहतर नस्ल और बाजार व्यवस्था के जरिए पशुपालन को मजबूत करना, किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना है।

कंपनियों के मर्जर और डी-मर्जर पर स्टांप ड्यूटी के नियम

उत्तर प्रदेश में कंपनियों के विलय यानी मर्जर और विभाजन यानी डी-मर्जर की प्रक्रिया को स्पष्ट बनाने के लिए स्टांप ड्यूटी से संबंधित प्रस्ताव तैयार किया गया है।

स्टांप मंत्री रविंद्र जायसवाल ने बताया कि प्रदेश में पहले कंपनियों के मर्जर और डी-मर्जर के लिए स्टांप ड्यूटी का स्पष्ट प्रावधान नहीं था। इस वजह से उद्यमियों को प्रक्रिया के दौरान भ्रम और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

प्रस्ताव के तहत कंपनी के मर्जर या डी-मर्जर में शेयर वैल्यू पर 0.50 फीसदी स्टांप ड्यूटी लगाने का प्रावधान किया गया है। यदि संबंधित मामले में संपत्ति शामिल होती है, तो उस पर दो फीसदी स्टांप ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव है। कंपनी का पंजीकरण और कंपनी रजिस्ट्रार (आरओसी) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शेयर वैल्यू के आधार पर स्टांप ड्यूटी देनी होगी।

सर्किल रेट के आधार पर स्टांप ड्यूटी की समस्या पर होगा काम

रविंद्र जायसवाल के मुताबिक, स्पष्ट नियम नहीं होने के कारण कई मामलों में सर्किल रेट के बराबर स्टांप ड्यूटी की मांग की जाती थी। इससे कंपनियों के विलय की प्रक्रिया में उद्यमियों को परेशानी होती थी।

उन्होंने बताया कि गुजरात और महाराष्ट्र में इस तरह का प्रावधान है। उत्तर प्रदेश में भी इसे लागू करने की दिशा में कदम उठाया गया है। स्टांप ड्यूटी का विषय समवर्ती सूची से जुड़ा होने के कारण प्रस्ताव केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इसे प्रदेश में लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

यूपी में नावों के पंजीकरण और जल परिवहन के लिए बनेगी नई व्यवस्था

कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश में जल परिवहन को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए नावों और पानी के जहाजों के पंजीकरण की व्यवस्था से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी।

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि अब तक मोटर से चलने वाले जहाजों और नावों के संचालन को लेकर स्पष्ट नियमावली नहीं थी। नई व्यवस्था में यांत्रिक और गैर-यांत्रिक, दोनों तरह की नावों का पंजीकरण किया जाएगा।

जल परिवहन की निगरानी के लिए बनेगी इनलैंड वाटर अथॉरिटी

जल परिवहन के संचालन और निगरानी के लिए इनलैंड वाटर अथॉरिटी बनाई जाएगी। इसके अध्यक्ष परिवहन मंत्री होंगे। इंजन से चलने वाले बड़े जहाज यांत्रिक श्रेणी में रखे जाएंगे, जबकि गांवों में इस्तेमाल होने वाली मोटर चालित छोटी नावों के लिए अलग श्रेणी निर्धारित की जाएगी।

नावों का वर्गीकरण यात्रियों की क्षमता के आधार पर भी होगा। इसमें 10 यात्रियों वाली मोटर नाव, पांच से 10 यात्रियों वाली नाव और पांच तक यात्रियों की क्षमता वाली नाव जैसी श्रेणियां शामिल होंगी। गैर-यात्री नावों के पंजीकरण के लिए 50 रुपये शुल्क प्रस्तावित है।

यात्रियों और नाविकों के बीमा का भी प्रावधान

नई व्यवस्था के तहत जल परिवहन से जुड़े छोटे और असंगठित क्षेत्र को भी नियमों के दायरे में लाया जाएगा। नावों और नाविकों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। दयाशंकर सिंह ने बताया कि फिलहाल गैर-यांत्रिक नावों से जुड़ा व्यवस्थित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

प्रस्ताव में यात्रियों और नाविकों के बीमा की व्यवस्था भी शामिल है। नावों के पंजीकरण और निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को दी जाएगी। इसमें सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) प्रशासन, तहसील स्तर के अधिकारी और आरआई की भूमिका होगी।

गंगा-यमुना समेत 11 नदियों पर जल परिवहन की योजना

प्रदेश की गंगा और यमुना समेत 11 नदियों पर जल परिवहन को लेकर काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य नदियों के जरिए परिवहन की संभावनाओं को विकसित करना और नावों के संचालन को अधिक सुरक्षित तथा व्यवस्थित बनाना है।

48,062 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को मिलेगी कैशलेस चिकित्सा सुविधा

कैबिनेट ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। इसके तहत अशासकीय सहायता प्राप्त, वित्तविहीन और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को इस सुविधा का लाभ मिलेगा।

फैसले के अनुसार, अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के 23,989, वित्तविहीन विद्यालयों के 22,541 और अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों के करीब 110 शिक्षणेत्तर कर्मचारी इस योजना में शामिल होंगे। कुल 48,062 कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा।

सरकार प्रत्येक कर्मचारी के बीमा प्रीमियम के लिए 3,000 रुपये देगी। इस पर कुल 14.41 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को पांच लाख रुपये तक के इलाज की कैशलेस सुविधा उपलब्ध होगी।

बेसिक शिक्षा के 1.22 लाख से अधिक कर्मचारियों को भी लाभ

बेसिक शिक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों को भी इसी तरह की चिकित्सा सुविधा देने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न श्रेणियों के कुल 1,22,305 कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा।

इनमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, लिपिक, वित्तविहीन संस्थानों के कर्मचारी और जिला परियोजना से जुड़े कर्मी शामिल हैं।

सैनिक स्कूल मैनपुरी के विस्तार के लिए मुफ्त जमीन को मंजूरी

कैबिनेट ने सैनिक स्कूल मैनपुरी के विस्तार के लिए ग्रामीण क्षेत्र में निःशुल्क जमीन उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। यह स्कूल 22 जुलाई 2019 से संचालित है। जमीन उपलब्ध होने से स्कूल के विस्तार का रास्ता साफ होगा।

इस तरह यूपी कैबिनेट की बैठक में पशुपालन, कंपनियों के मर्जर और डी-मर्जर, जल परिवहन, कर्मचारियों की चिकित्सा सुविधा और सैनिक स्कूल के विस्तार से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।