जौहर यूनिवर्सिटी की 426.46 करोड़ की संपत्ति कुर्क, 45 प्लॉट पर अवैध कब्जे का आरोप

जौहर यूनिवर्सिटी की 426.46 करोड़ की संपत्ति कुर्क, 45 प्लॉट पर अवैध कब्जे का आरोप

🔴 हाइलाइट्स

  • 426.46 करोड़ की संपत्ति कुर्क: ईडी ने रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच किया।
  • 45 प्लॉट पर अवैध कब्जे का आरोप: जांच रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 34 एकड़ शत्रु संपत्ति पर कब्जे का मामला सामने आया।
  • 1170 करोड़ रुपये बाजार मूल्य: कुर्क की गई संपत्ति का मौजूदा बाजार मूल्य लगभग 1170 करोड़ रुपये बताया गया है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई इस कार्रवाई में 426.46 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति शामिल है, जिसका मौजूदा बाजार मूल्य लगभग 1170 करोड़ रुपये आंका गया है। यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खां और अन्य लोगों के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई है।

ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय ने यह कार्रवाई विश्वविद्यालय परिसर में जमीन और भवनों के निर्माण से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच के बाद की है। जांच में सरकारी कार्यों के लिए आवंटित धन को विश्वविद्यालय के निर्माण में इस्तेमाल करने, ठेकेदारों से ट्रस्ट को चंदा मिलने और संपत्ति के निर्माण पर हुए खर्च से संबंधित कई अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।

रामपुर के गांव सिंघानखेड़ा, जिसे जौहर नगर भी कहा जाता है, में स्थित इस विश्वविद्यालय का परिसर मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के पास है। ट्रस्ट की स्थापना मोहम्मद आजम खां ने की थी और इसका नियंत्रण भी उन्हीं के पास है। वह विश्वविद्यालय के मानद चांसलर भी हैं।

45 प्लॉट और करीब 34 एकड़ शत्रु संपत्ति पर कब्जे का मामला

ईडी ने रामपुर के अजीम नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज 26 एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। इन मामलों में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 384 और अन्य धाराओं के तहत आरोप लगाए गए कि विश्वविद्यालय के लिए किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जा किया गया था।

रामपुर जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट में भी जमीन से संबंधित गंभीर आरोप सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक, गांव सिंघानखेड़ा में शत्रु संपत्ति के 45 प्लॉट, जिनका क्षेत्रफल लगभग 34 एकड़ है, पर मोहम्मद आजम खां ने विश्वविद्यालय के लिए अवैध रूप से कब्जा किया था।

आरोप है कि यह कब्जा उस समय किया गया, जब संबंधित जमीन के लिए कस्टोडियन की ओर से जारी लीज एग्रीमेंट पहले ही रद्द किया जा चुका था। अब रामपुर जिला प्रशासन के माध्यम से गृह मंत्रालय के अधीन कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी ने इस जमीन का कब्जा वापस ले लिया है।

सरकारी काम के लिए मिले फंड का विश्वविद्यालय में इस्तेमाल

जांच के दौरान ईडी को पता चला कि सार्वजनिक कार्यों के लिए आवंटित धन का इस्तेमाल विश्वविद्यालय परिसर में किया गया। आरोप है कि सरकारी ठेकों से जुड़े ठेकेदारों को मिले फंड का एक हिस्सा विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों में लगाया गया और ठेकेदारों से प्राप्त रकम दान के रूप में ट्रस्ट को वापस भेजी गई।

ईडी ने इस जानकारी को उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ साझा किया। इसके बाद रामपुर के अजीम नगर पुलिस स्टेशन में मोहम्मद आजम खां, ट्रस्ट और अन्य लोगों के खिलाफ केस संख्या 0224/2026 दर्ज किया गया। यह मामला 13.10.2026 को दर्ज हुआ।

इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धाराओं 61, 316(5) और 318(4) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं 7 और 13 के तहत केस दर्ज किया गया है।

2016 में परिवारों के घर तोड़ने और लूटपाट के आरोप

ईडी ने रामपुर पुलिस की ओर से मोहम्मद आजम खां और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज 28 अन्य एफआईआर की भी जांच शुरू की है। इनमें से ज्यादातर मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।

इन एफआईआर और चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2016 में रामपुर शहर में कई परिवारों के घर बुलडोजर से ढहा दिए गए थे। इनमें कई परिवार वक्फ संपत्ति में किराएदार के रूप में रह रहे थे।

आरोपों के मुताबिक, तत्कालीन सर्कल ऑफिसर और अन्य लोगों के नेतृत्व में एक भीड़ ने मोहम्मद आजम खां के निर्देश पर इन घरों को तोड़ा था। वहां रहने वाले लोगों के साथ मारपीट की गई और उन्हें झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी दी गई। इसके अलावा, उनसे नकदी, गहने और मवेशी लूटने के आरोप भी लगाए गए हैं।

ईडी की जांच से संबंधित एफआईआर और चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि तोड़े गए घरों का मलबा विश्वविद्यालय परिसर में ले जाया गया था। वहीं, रामपुर नगर पालिका के लिए खरीदी गई सफाई मशीनरी को भी विश्वविद्यालय परिसर में भेजने का आरोप है।

ठेकेदारों और निर्माण सामग्री से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच

जांच में सामने आया कि मुख्य रूप से रामपुर के रहने वाले ठेकेदारों ने सरकारी ठेकों के लिए मिले धन और निर्माण सामग्री का इस्तेमाल विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों में किया।

ऐसी ही एक कंपनी के प्रबंध निदेशक ने स्वीकार किया कि उनकी कंपनी को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से लगभग 186 करोड़ रुपये के ठेके मिले थे। उनके मुताबिक, ठेकों की कुल रकम का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा विश्वविद्यालय के लिए निर्माण सामग्री खरीदने में इस्तेमाल किया गया।

एक अन्य फर्म के साझेदारों ने भी माना कि वे मोहम्मद आजम खां के प्रभाव में काम करते थे। इस फर्म ने ट्रस्ट को 40 लाख रुपये का चंदा दिया था।

इसके अलावा, आयकर विभाग ने आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द कर दिया है।

सरकारी निधि और विभागों के जरिए कराए गए निर्माण कार्य

जांच में विश्वविद्यालय के निजी परिसर में सरकारी धन से कराए गए विभिन्न निर्माण कार्यों का भी उल्लेख है। एमएलए/एमएलसी स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से परिसर में 6.60 करोड़ रुपये के काम कराए गए थे। इन कार्यों को उत्तर प्रदेश जल निगम ने पूरा किया था। उस समय मोहम्मद आजम खां इस निगम के अध्यक्ष थे।

ईडी की जांच के अनुसार, राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करके ट्रस्ट को मेरठ की दो शैक्षणिक संस्थाओं से 6.24 करोड़ रुपये का चंदा भी मिला था।

इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश सरकार ने विश्वविद्यालय के निजी परिसर में पंडाल, ओबीसी लड़कों के छात्रावास और अस्पताल ब्लॉक के निर्माण के लिए कुल 23.41 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी।

पंडाल के स्वामित्व की शर्तों में हुआ बदलाव

वर्ष 2015 के सरकारी आदेश में पंडाल के निर्माण के लिए 12.16 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। इस आदेश में स्पष्ट शर्त थी कि पंडाल का स्वामित्व उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग के पास रहेगा। इसे बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता था और राज्य सरकार को अपने उपयोग के लिए यह सुविधा मुफ्त उपलब्ध कराई जानी थी।

हालांकि, वर्ष 2016 के बाद के एक आदेश में इन शर्तों को बदल दिया गया। पंडाल का स्वामित्व जौहर विश्वविद्यालय को सौंप दिया गया और राज्य सरकार के लिए इसे इस्तेमाल करने की शर्त भी हटा दी गई।

इस बदलाव के परिणामस्वरूप राज्य के धन से तैयार की गई सार्वजनिक संपत्ति विश्वविद्यालय की निजी संपत्ति बन गई। वर्ष 2015 और 2016 में जब ये आदेश जारी हुए, उस समय मोहम्मद आजम खां उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। उनके पास शहरी विकास और उत्तर प्रदेश जल निगम से जुड़े विभाग थे। परिसर में निर्माण कार्य करने वाला उत्तर प्रदेश जल निगम उनके शहरी विकास विभाग के अधीन था।

विश्वविद्यालय परिसर की कुल लागत 499.09 करोड़ रुपये आंकी गई

विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों पर हुए खर्च का आकलन जिला मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर किया गया। 10.11.2023 की इस रिपोर्ट में परिसर की 59 इमारतों की निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये बताई गई है।

इसके अलावा, 114 बिक्री विलेखों के माध्यम से अधिग्रहित विश्वविद्यालय की जमीन का मूल्य 4.63 करोड़ रुपये आंका गया। दोनों रकम को मिलाने पर विश्वविद्यालय परिसर की कुल लागत 499.09 करोड़ रुपये बैठती है।

इसके मुकाबले, ट्रस्ट ने अपने आयकर रिटर्न में केवल 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय दिखाया था। जांच में इस रकम में शामिल 12.29 करोड़ रुपये के चंदे फर्जी पाए गए। इस तरह, विश्वविद्यालय की इमारतों के निर्माण और जमीन अधिग्रहण पर ट्रस्ट का वास्तविक खर्च 66.03 करोड़ रुपये रह गया।

426.46 करोड़ रुपये के स्रोत का हिसाब नहीं दे सका ट्रस्ट

ईडी की जांच के मुताबिक, विश्वविद्यालय परिसर की कुल लागत 499.09 करोड़ रुपये में से केवल 72.63 करोड़ रुपये का ही वैध स्रोत साबित हो पाया। शेष 426.46 करोड़ रुपये की गणना कुल लागत में से वैध स्रोतों से साबित रकम घटाने के आधार पर की गई।

ईडी ने इस शेष रकम को मामले में अपराध से प्राप्त आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) माना है। जांच एजेंसी के अनुसार, ट्रस्ट के पदाधिकारी 426.46 करोड़ रुपये के स्रोत को साबित नहीं कर सके।

इसी आधार पर पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है। कुर्क की गई संपत्ति का मूल्य 426.46 करोड़ रुपये है, जबकि उसका मौजूदा बाजार मूल्य लगभग 1170 करोड़ रुपये बताया गया है।

ईडी की यह कार्रवाई ट्रस्ट, मोहम्मद आजम खां और अन्य लोगों के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है। इसमें जमीन पर कब्जे, सरकारी धन के इस्तेमाल, निर्माण कार्यों और ट्रस्ट को मिले चंदे से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है।